कल आज और कल

कल आज और कल

Sunday, October 29, 2017

प्यार : कल आज और कल


दोस्तो प्यार से तो आप सभी लोग भली-भाँति परिचित ही होंगें। प्यार एक अहसास है, जो सभी लोगों को उनके जीवन में एक न एक बार अवश्य होता है, और कई लोगों को तो कई कई बार हो जाता है। प्यार कई प्रकार का होता है, जैसे: माता-पिता का प्यार, भाई-बहन का प्यार,पति-पत्नी का प्यार और प्रेमी प्रेमिका का प्यार। दोस्तो इनमे से जो सबसे ज्यादा रोमांचक होता है, वो है प्रेमी प्रेमिका का प्यार।

आज हम प्रेमी प्रेमिका के प्यार पर बात करेंगे।
दोस्तो पहले प्रेमी प्रेमिका वाले प्यार को अपराध माना जाता था, और प्यार करने वालों को अपराधी। अगर समाज में लोगों को प्यार करने वालों के बारे में पता चल जाता था, तो वो लोग प्रेमी जोड़े को तरह तरह से प्रताड़ित करने लगते थे। या तो लड़की की जबरन शादी कर दी जाती थी या फिर दोनों को मार दिया जाता था। ऐसे कुछ अमर प्रेमी जोड़ों के नाम आपने अवश्य सुने होंगे जैसे : लैला मजनूं और हीर रांझा।

लेकिन फिर भी लोग छुप छुप के प्यार करते थे। दोस्तो पहले एक और बहुत बड़ी समस्या होती थी और वो होती थी प्यार का इज़हार। प्यार तो हो गया लेकिन अब इज़हार कैसे हो। लोगो को प्यार का इज़हार करने में महीनों और सालों का समय लग जाता था। जब तक इज़हार नहीं होता था, तब तक बस दूर दूर से ही एक दूसरे को देखकर काम चलाना पड़ता था। और एक दिन वो हसीन पल आ ही जाता था जिस दिन किसी चिट्ठी के माध्यम से या किसी दोस्त या सहेली के माध्यम से प्रेम का इज़हार हो जाता था, और फिर शुरू होता था, चिट्ठियों का सिलसिला। और दोस्तों सबसे मज़े की बात, जो हमारा लोकल डाकिया हुआ करता था, मोहल्ले का छोटू , थोड़े से कम्पट, टॉफी और पैसो की छोटी सी तनख्वाह में चिट्ठियों का आदान प्रदान पूरी मेहनत और लगन के साथ किया करता था।

और कभी कभी चोरी छिपे किसी बहाने से, किसी शादी या गाँव के मेले में प्रेमी जोड़े का मिलन भी हो जाता था। कई बार तो प्रेमी प्रेमिका से मिलने के लिए रात के अंधेरे में 15 से 20 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर उससे मिलने उसके गांव पहुँच जाता था, कभी कभी तो मुलाकात हो जाती थी और कभी कभी बस देखकर ही वापस लौटना पड़ता था। प्रेमी जोड़े आपस में आंखों से ही बाते कर लिया करते थे,ताकि किसी और को पता न चल सके.

लेकिन इस प्यार की उम्र तभी तक होती थी, जब तक किसी को पता न चले, जैसे ही किसी को पता चला या ज़रा सा शक भी हुआ तो समझो प्यार समाप्त। लेकिन कुछ लोग उस ज़माने में भी, प्यार को समझते थे और प्यार का सम्मान करते थे, उस ज़माने में भी इक्का दुक्का प्रेम विवाह हो जाता था, लेकिन उसके लिए भी बड़े बड़े पापड़ बेलने पड़ते थे । लेकिन आज कल सब कुछ बड़ा जल्दी जल्दी होने लगा है।
आजकल प्यार भी बहुत जल्दी हो जाता है, और प्यार का इज़हार भी, और जितनी तेजी से ये सब होता है, उतनी तेज़ी से ही सब टूट भी जाता है। प्यार को नए नए शब्दो से संबोधित किया जाता है, प्यार में पड़ने को patch up और अलग हो जाने को break up कहा जाता है।

आजकल जितनी जल्दी patch up होता है break up उससे भी तेजी से हो जाता है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी प्यार हो जाता है। अपने पसंद की लड़की को देखकर, अपने दोस्तों से कहते है- वो देख तेरी भाभी आ गयी। फिर दूसरा दोस्त बोलेगा - लाल ड्रेस वाली मेरी हरी वाली तेरी । यहां तक कि आपस में एक दूसरे को blackmail करते हैं- सीधे बैठ वरना भाभी को बता दूंगा । अगर एक दिन लड़की कॉलेज नही आई तो सारे दोस्त बोलेंगे- आज भाई का मन नही लग रहा क्योंकि भाभी नही आई है। और फिर सारे, अपने दोस्त के लिए भाभी की खबर लाने चल देते हैं।

ईमानदारी इतनी की आपस में तय करने के बाद सिर्फ अपनी अपनी वाली को ही देखते हैं। अगर किसी और ने देख लिया तो उसकी तो शामत आयी समझो। अगर बात बन गयी तो ठीक वरना class change और भाभी change ।
आजकल प्रेमी जोड़े को बात करने के लिए किसी छोटू की जरूरत नहीं पड़ती। बल्कि आजकल बाबा जियो और मोबाइल फ़ोन्स प्रेमी जोड़ों के भगवान हैं। जिन्होंने प्रेमी जोड़ों को बात करने की पूरी आजादी दे रखी है। प्रेमी जोड़े एक दूसरे के पल पल की खबर रखते हैं- खाना खाया या नहीं, पानी पिया या नहीं, कहाँ हो, क्या कर रहे हो क्या नहीं। और तो और आजकल video call से एक दूसरे को देख कर  भी बाते कर लेते हैं।
और पर्यावरण संरक्षण हेतु सरकार ने तरह तरह के पार्को का निर्माण कराकर बैठने के लिए जगह भी दे दी है।
तो पहले की अपेक्षा आजकल प्रेमी जोड़ों के लिए  ज्यादा सुविधाएं हैं। बस अंतर है तो केवल इतना कि, पहले प्रेम भावनात्मक और आत्मीय होता था परंतु आजकल शारीरिक और आडम्बर से परिपूर्ण होता है।

दरअसल आजकल लोग प्यार को समझ ही नहीं पाते बल्कि वो आकर्षण को ही प्यार समझ लेते हैं। हम इंसानो के लिए एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन आकर्षण को ही प्रेम समझ लेना हमारी भूल है।
कहीं जाते हुए, कहीं से आते हुए या आपके कार्यस्थल पर कोई लड़की अच्छी लग जाती है, मन को भा जाती है, तो ये प्यार नहीं बल्कि ये आकर्षण है, और दोस्तो आकर्षण कई बार हो सकता है, रोज़ भी हो सकता है। लेकिन प्यार रोज़ नहीं हो सकता। प्यार सिर्फ अच्छी और खूबसूरत शक्ल देखकर नहीं होता, बल्कि प्यार तब शुरू होता है, जब आप एक दूसरे को समझना शुरू करते हैं। जब एक दूसरे की अच्छाइयां और बुराइयां समझ में आने लगती हैं, जब हम किसी को उसकी वास्तविकता के साथ स्वीकार कर लेते हैं, तो वो होता है प्यार।

आजकल लोग समझते है की जिससे प्यार करो उसको किसी भी कीमत पर हासिल कर लो चाहे उससे किसी का बुरा ही क्यों न हो जाये । अपने प्यार को पाने के लिए अपने साथी को ही दुख पहुँचा देते हैं। अगर तुम मेरी नहीं हो सकती तो किसी की नहीं हो सकती, इस तरह की दूषित  सोच रखते हैं, तो दोस्तो ये प्यार नहीं। ये सब फिल्मी बातें है जो मनोरंजन के लिए ही ठीक हैं। प्यार हमें पाने की ज़िद, हासिल करने का जुनून, एकाधिकार, बदले की भावना, ये सब नहीं सिखाता बल्कि, प्यार में एक दूसरे की खुशी, एक दूसरे का सम्मान, आत्मसमर्पण ये ज्यादा जरूरी होता है, जो कि हमें भगवान श्री कृष्ण और राधा के प्यार से सीखने को मिलता है जिन्होंने प्यार तो किया लेकिन साथ में नहीं रह सके। राधा जी हमेशा मन से श्री कृष्ण की ही रहीं, उन्होंने खुद को श्रीकृष्ण के लिए समर्पित कर दिया। श्रीकृष्ण अगर चाहते तो राधा जी को हासिल कर सकते थे, उनके लिए ये बहुत ही आसान होता, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि ये प्रेम की मर्यादा का उल्लंघन होता।
दोस्तों प्रेम ईश्वर द्वारा मनुष्य को दिया गया अनमोल उपहार है। हमें इस उपहार का सही प्रयोग करना चाहिए।
आने वाली पीढ़ी को हमें प्रेम के प्रति शिक्षित करना चाहिए उन्हें प्रेम और आकर्षण में अंतर समझाना चाहिए, ताकि हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर सके जहाँ हर तरफ केवल प्रेम ही प्रेम हो ।

Love is a Noble Virtue of Human Heart...(Rudra Tiwari)
दोस्तों आपको मेरे विचार कैसे लगे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके मुझे अवश्य अवगत कराएं आपके विचारो की प्रतीक्षा में----

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